कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 0925

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बस दो ही कदम तो चली थीं अमृता

बस दो ही कदम तो चली थीं अमृता .... एक में रुक गई दूजे में बस गई इन दोनों कदमों के बीच न जाने कितनी बार हमने सुना .... मैं तुम्हें फिर मिलूंगी।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें