कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 0922

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तुम्हें तुममें से तुमसा तुमको खुद के लिए रख लेना कोई कम जाद…

तुम्हें तुममें से तुमसा तुमको खुद के लिए रख लेना कोई कम जादू है...वो भी तब जब कि तुम मेरे लिए हो ही नहीं.... बाखुदा कमाल की हो कल्पना...
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें