कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 0905

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दिन भर की देह रात शब्द हो जाते हैं

दिन भर की देह रात शब्द हो जाते हैं... रात भर की कविता सुबह फिर देह ... शुभ नवरात्र 💐💐💐
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें