कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 0894

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कम का मतलब कभी भी थोड़ा नहीं होता ।

कम का मतलब कभी भी थोड़ा नहीं होता । हाँ .......थोड़ा है थोड़े की ज़रूरत है ये हो सकता है। फिर चाहे वो शब्द हों ....प्रेम हों.... या आप। अक्सर पूछ लेते हैं पाठक मुझसे ये कतरनें क्यों लिखती हो कल्पना ? पन्ने भर कर क्या करूँगी जब आपके मन का एक क़तरा भी न छू पाऊँ तो ...ये कहना चाहती हूं पर मुस्कुराकर कहती हूँ ...मन कम कहता है पर मेरा कम कम भी आपको थोड़ा न लगे इस लिए ढेर सारा लिखती हूँ। पिछले चार सालों से यही सोच कर fb platform पर लिखती हूँ कि थोड़ा है थोड़े की जरूरत है। फिर चाहे वो शब्द हों ... या आप । मेरे साथ बने रहने का शुक्रिया।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें