कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 0866

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शब्दों में इतनी सारी तड़प कैसे रखते हो

शब्दों में इतनी सारी तड़प कैसे रखते हो ? सैकड़ों बल कागज़ के माथे पर महसूस होते हैं और इक कसक अँखियों को बहुत देर तक घूरती चली जाती है। उदासी नीली से बैंगनी होते हुए आखिरकार स्याही सी काली हो जाती है । गहरा काला रंग.....शब्दों की उदासी पर फ़ब्ता है। आज फिर पढ़ी ये कहानी ...👌👌👌👌
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें