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रचना 0864

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कविता अपनी नाल तोड़ना जानती है

कविता अपनी नाल तोड़ना जानती है.... बहुत हो चुके .... तखलिया.... ये कुछ शब्द बहुत सारे अभद्र लोगों को कहने का मन है @अनामिका जी😊😊😊😊😊 love u
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें