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रचना 0861

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अक्सर कॉफी टेबल को छोड़ कर जाते हुए

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अक्सर कॉफी टेबल को छोड़ कर जाते हुए ..... हम अपना एक बड़ा हिस्सा खाली कप की तह पर छोड़ आते हैं ।मुलाकात शब्दों की होती है और तो और कॉफी भी शायद आंखें ही पीती हैं। जुड़ती तो सिर्फ़ मुस्कान है। मिलना तय नहीं होता ।तय तो सफर होते हैं बैठे बैठे अगले ... पिछले ... और शायद आने वाले सभी उसी कॉफ़ी टेबल पर । 😊😊😊😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें