कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 0803

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कितना ठगोगे यार

कितना ठगोगे यार ? बस करो। अक्सर मैं अपने शब्दों से पूछती हूँ ... और तुम बस ...."उफ्फ" कह कर टाल देते हो। 😊😊😊😊😊याद
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें