भाषा / Language
अपना पसंदीदा प्रेम अनलिखा हो चाहे अनकहा भी.... अपनी तरफ ही…
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अपना पसंदीदा प्रेम अनलिखा हो चाहे अनकहा भी.... अपनी तरफ ही आता सा लगता है।
हम बुद्धधु हैं क्या ?
शब्दों से सपने देख लेते हैं।
धत्त!
😊😊😊😊याद
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें