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रचना 0792

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तुम्हारी याद तो इतनी ढ़ेर सारी आती है

तुम्हारी याद तो इतनी ढ़ेर सारी आती है... तुम्हारी इत्तु सी "हां " क्यों नहीं आती ? कहानी ...अभी चलेगी दूर तक शायद 😊😊😊😊याद
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें