भाषा / Language
तुम भ्रम ही रहो
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तुम भ्रम ही रहो .....
होने और......... ना होने के बीच कितना सारा
नीले समंदर से
असमानी नीलम से
उस गाढ़ी स्याहि से ....
जो स्याह करे पर कागज़ उजला छोड़ दे
सेंक
और
ताप के बीच का सम्मोहन हो तुम
लाओ अपनी आंखें बंद कर दूं
तुम्हें आज़ाद कर दूं
तुम्हारी तलाश दूर तक जाएगी।
वादा......
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें