कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 0742

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देर रात कागज़ पर उदासियाँ धर कर सोई थी कल्पना .. कुछ शब्द थे…

देर रात कागज़ पर उदासियाँ धर कर सोई थी कल्पना .. कुछ शब्द थे ....अगली सुबह इनबॉक्स में मुस्कुराती कल्पना मिली ।शुक्रिया जादूगर Ashok Lall जी ... मुझे ज़िन्दगी सा खूबसूरत बनाने के लिए। ये वो हैं ... जिनसे ज़िन्दगी गुलज़ार है। जिस खूबसूरती से आप दूसरों के शब्द,सोच और सूरत को अपनी fb wall पर जगह देते हैं .... कम लोग ही कर पाते हैं। Golden heart ......💐💐💐💐 अशोक जी एक बार फिर शुक्रिया ।आप की कला नायाब है।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें