कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 0732

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उगता सूरज सोख लेती हूँ

उगता सूरज सोख लेती हूँ ढलता है तो रोक लेती हूँ मैं कल्पना हूँ 😊😊😊😊 Thank u Ranjana Yadav for this awesome pic.
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें