कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 0719

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मैं इस बात पे हैरान हूँ कि रुका क्यूं नहीं

मैं इस बात पे हैरान हूँ कि रुका क्यूं नहीं ? वो इस बात से परेशान कि झुका क्यूं नहीं ? अबके जो लौटा इश्क़ ...... बस गुलज़ार रहे
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें