कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 0656

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आज फिर उसी किताब का वही पन्ना तक रही हूँ।तुम्हारे शब्दों के…

आज फिर उसी किताब का वही पन्ना तक रही हूँ।तुम्हारे शब्दों के साथ long drive पर निकल जाना सुकून देता है।कागज़ की खुश्बू तुमसे गुज़र कर मीलों तक संग चलती है। रास्ता होता नहीं .... बनता जाता है| नज़ारे होते नहीं .... बनते जाते हैं । जादूगर तुम मुझे बहुत पसंद हो।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें