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रचना 0640

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तुम्हारे बंद सवालों को मेरे खुले जवाब रास नहीं आएंगे

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तुम्हारे बंद सवालों को मेरे खुले जवाब रास नहीं आएंगे सूरज को ढंका ही रहने दो..... अनहद कल्पना
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें