तुम्हारे बंद सवालों को मेरे खुले जवाब रास नहीं आएंगे सूरज को ढंका ही रहने दो..... अनहद कल्पना
रचना 064018 फ़रवरी 2017भाषा / Languageहिन्दीEnglishतुम्हारे बंद सवालों को मेरे खुले जवाब रास नहीं आएंगे✦तुम्हारे बंद सवालों को मेरे खुले जवाब रास नहीं आएंगे सूरज को ढंका ही रहने दो..... अनहद कल्पनाकल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें