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रचना 0620

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तुम कहाँ उसे देख पाते हो जैसे मैं उसे देख पाती हूँ

तुम कहाँ उसे देख पाते हो जैसे मैं उसे देख पाती हूँ इक कविता आवाज़ की सेंक हथेली पर चाँद और इक स्माइली आज यही कमाया ... यही लिखा गया😊😊😊😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें