कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 0612

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"फ़ब्ता "और "फ़ब्ती " के बीच

"फ़ब्ता "और "फ़ब्ती " के बीच .... मुझे सैंकड़ों बार रंगा है तुमने .... उसी लाल वाली कूँची से जानते थे ना ...... दूसरे रंग मुझे कमज़ोर नहीं होने देते ?
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें