कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 0607

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In conversation with self to create something which is call…

In conversation with self to create something which is called poetry but for me its........शब्दों से इश्क़ ख़ामोशी में रक्स करते हुए लफ़्ज़ों को देखा है कभी ? बिना खनक...... बिना छनक बस चुप्पी की पाज़ेब पहने बेआवाज़ महावर लगाये छाप छोड़ते जाते हैं कागज़ पर फिर मिज़ाजी उन्हें नाम दिया करते हैं कोई उसे ग़ज़ल कहता है .....कोई नज़्म कोई कविता कहता है उसे ....कोई रुबाई और महफ़िल में इक हुक सी बिछ जाती है ..... आफरीन......आफरीन इक लंबी ख़ामोशी के बाद रक्स कर थके लफ्ज़ हमेशा के लिए सो जाते हैं अंतर्मन शांत हो जाता है कागज़ पर कुछ नायाब नज़र आता है
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें