कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
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रचना 0598

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आज इक बात कहना चाहूंगी

आज इक बात कहना चाहूंगी..... मेरे शब्द मेरे जिजीविषा हैं ..... ज़रिया नहीं । मैं अपना ही लिखा खरीदना नहीं चाहूंगी। शब्द देकर छपना चाहूंगी .... रूपए देकर नहीं चाहे कितने शब्द ख़र्चने पड़े मुझे मैं इंतज़ार करुँगी तब तक .... बिना रुके लिखती रहूंगी। 😊😊😊😊😊😊 साथ दीजियेगा हमेशा मेरा 💐💐
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें