भाषा / Language
ड्राइविंग
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ड्राइविंग........
कैसे समझाऊं .....कब समझोगे ?
कि "तुम"..... "मोड़" नहीं हो मेरे लिए
तुम "पड़ाव" हो
मेरा ठहराव हो
उस "डगर" पर
जो "आती - जाती "नहीं ....
सिर्फ जाकर थम जाती है
वही कहीं रम जाती है
कभी आना चाहो मुझ तलक
तो..... इसी "रस्ते "आना
और सुनो !
"हम" नाम की "तख़्ती" ढूंढना
जल्दी पहुंचोगे
बिना बूझे
इक बात और ..... मेरी तरह "सुकून" से आना
जानते तो हो ....
मुझे "शॉर्टकट्स".....
और......"रैश ड्राइविंग"से कितनी चिढ है
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें