भाषा / Language
क्योंकि trend आपका शुरू किया हुआ है तो "द "से ......दिव्य प…
✦
क्योंकि trend आपका शुरू किया हुआ है तो "द "से ......दिव्य प्रकाश दुबे जी आपकी "म "से मुसाफ़िर कैफ़े पढ़ी ।
किताब की पहली लाइन....बातें किताब से बहुत पहले पैदा हो गयी थी .... पढ़कर ही लगा की आज शाम बेहद रूमानी गुजरने वाली है .... इस बात को आपने आखिरी तक संजोये रखा क्योंकि पूरी कहानी में आपके किरदार बोलते रहे .... और जब जब वो चुप हुए कहानी ने पैंतरा बदला l
no strings attached वाला रिश्ता हूबहू कागज़ पर खड़ा कर दिया आपने ।कई बार मैं सुधा भी हुई और कई बार चंदर भी बनकर देखा।दोनों का किरदार इतना crisp लगा कि क्या बताऊँ... सिरफिरी, ज़िद्दी,उसूलों पे कायम सुधा और loving , extracareful but lost चंदर .... इक जुगनू .......इक तितली
इतनी बड़बोली कहानी में जैसे ही अबोला पसरा , दोनों को इक दूसरे के अलावा कुछ भी दिखना बंद हो गया पर उनके उसूल और ख्वाब रुके रहे .... बस यहीं आपने कहानी को जीत लिया
जो अनकहा प्रेम लिखा ना आपने... वो भाता चला गया | है तो है....वाला एहसास ... जा जा कर आने वाला आभास ।
पहाड़ों को करीब से जानती हूँ मैं भी .... पर जिस खूबसूरती से आपने पहाड़ों पर इश्क़ जमाया, जिस खूबी से आपने चंदर की ख्वाइश को वहां रोपा ,जिस तरीके से आपने पम्मी को पहाड़ों पर कायम किया और जिस सलीके से आपने इक परिवार को पहाड़ों पर बाँध दिया बस वही मुझे छू गया या यूँ कहिये ... "इ "से ......इश्क़ हो गया
The best part of your writing is your carefree use of english words which allowed me to relate so much . It was like ......this has to be this way only... 😊😊😊😊 The chats of sudha and chander were like ....yaar ye bas bolte hi rahein ....😊😊😊😊😊😊
Frankly speaking ...finished your book in one go ......not that I am a good reader ...it was really ......real and romantic . Love redefined😊😊😊😊
मुसाफ़िर कैफ़े.... Keep rocking ....you deserve this "द"से .......दिव्य प्रकाश दुबे जी
और आपका भी "अ" से आभार .....shailesh bharatwasi ji
Divya Prakash Dubey ji aur Shailesh Bharatwasi ji ....u both deserve a bow and a wow 💐💐💐💐💐💐💐
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें