कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 0570

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थी..... और........ हो सकती हूँ

थी..... और........ हो सकती हूँ के बीच.......... ढ़ेर सारा "आज" जीवित है मेरा जहाँ मैं अनंत होती हूँ कल...... सह कर भी आज .....बह कर भी और कल के लिए .......रह कर भी
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें