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रचना 0543

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जी तो बहुत था चाँद

जी तो बहुत था चाँद .... तुम्हारी ड्योढ़ी पर भी इक दीपक रख आती अपना नाम लिख आती पर .... तुम हो की मेरी ही देहलीज़ पर कंदील टांग रहे अब ऐसा भी क्या फ़िदा होना...? I mean....ऐसा भी क्या रोशन होना ?😊😊😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें