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रचना 0526

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आज सो जाइये

आज सो जाइये .... कल दिन भर .... इक चाँद को खनकता देखना है ....देहलीज़ के इस पार और रात भर उस दूजे चाँद को ........अर्श के उस पार मखमली डोर बंधी रहे ... 😊😊😊😊😊 😊 Happy karwa chauth to all the beautiful ladies and their personal चाँद....
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें