भाषा / Language
मुट्ठी भर आकाश नहीं .....पूरा आसमान लूँ
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मुट्ठी भर आकाश नहीं .....पूरा आसमान लूँ
सूरज से उसकी ......उजाले वाली दूकान लूँ
रात लिखा करूँ.......तारों पर अपनी दास्ताँ
इसलिए.. चाँद से वो खाली खाली मकान लूँ
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें