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रचना 0510

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आज शब्दों को पिघलने दो ......दरमियाँ

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आज शब्दों को पिघलने दो ......दरमियाँ आज की बिसात...... खामोशियों के प्यादे खेलेंगे बस...... तुम सुनते रहना मुझे ....कहने देना
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें