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रचना 0465

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अकेले हो कर ....बहुत दूर जा चुके अब तलक

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अकेले हो कर ....बहुत दूर जा चुके अब तलक इस फेर ....चलो संग रहकर दूर चले बहुत दूर .... संग संग
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें