कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 0440

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हर साल आती हूँ अल्मोड़ा

हर साल आती हूँ अल्मोड़ा..... दिल्ली की.... खरौंच को सहलाने उस शोर को भुलाने इक अंतहीन ताज़गी पाने कुछ अनकहे शब्द लुभाने दौड़नेे वाली थकान बहाने उस कोयल से बतियाने गर्मी में बरखा का मज़ा पाने Its awsome mousam in almora .... its raining ....
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें