कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 0436

भाषा / Language

मैं

मैं .... अपनी ख्वाइशों का प्याला रोज़ ... दो ही चीज़ों से भरती रहूंगी कभी जीत से ... कभी उस जीत को पाने की रीत से वो क्या कहते हैं.... हर जश्न के बाद .... Cheers !
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें