भाषा / Language
दिन गुज़र गया
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दिन गुज़र गया
लिबास ......बदलते बदलते
कई किरदार .......बदलते बदलते
अब तो
कुछ लम्हे तोड़ लो
उस मसरूफ ज़िन्दगी से
और
मेरे हथेलियों में ......धर दो
सिर्फ
तुम्हारे लिए हैं ......कह दो
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें