कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 0411

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सब कुछ जो भी कुछ संभव हो सके

सब कुछ जो भी कुछ संभव हो सके बीच हमारे उसे पाट देना लांघ कर इस तरफ चले आना जाने अनजाने ही सही बस वही ....सिर्फ वही याद रखने लायक है ..... है ना ?
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें