कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 0408

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जब तक जियोगी नहीं मुझे

जब तक जियोगी नहीं मुझे मैं "जरुरत" ही रहूंगी .... 'चाहत" ने अंगूठा दिखाकर आज मुझे फिर कह दिया
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें