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रचना 0403

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कभी मैं वसुधा

कभी मैं वसुधा कभी तुम नभ् भी कभी तुम धरा मैं भी आसमां सी इक दूसरे में संकुचित भी विस्तृत भी और इक नहीं दो क्षितिज हमारे कभी मेरा ......आसमां वसुधा वाला कभी तुम्हारा ......नभ् धरा वाला
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें