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रचना 0388

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जहाँ खुरचना चाहो खुरच लो

जहाँ खुरचना चाहो खुरच लो जहाँ दस्तक देना चाहो दे लो तुम ही मिलोगे .....प्रेम ज़िन्दगी बोली प्रेम क्या कहता मुस्कुराता हुआ बोला कभी खुद भी लिख लिया करो ....ज़िन्दगी कब तक मेरा लिखा copy paste करती रहोगी
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें