कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 0386

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सुनो

सुनो ..... वो क्या है ? जो सिर्फ दो मिनट में मिल जाता है बिना ढूंढे .......तुममें उफ्फ्फ....... "गूगल "क्यों कर रहे ? साफ़ दिख रहा है तुममें ..... मेरा .......चैन 😊😊😊😊😊😊😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें