कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 0371

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मैंने कहाँ कुछ कहा

मैंने कहाँ कुछ कहा .... "सुनो ना" .......यही तो कहा था .... क्या पता था ..... तुम्हारा सगरा रंग ......"इश्क़" हो जायेगा
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें