भाषा / Language
ये चाँद गवाह है
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ये चाँद गवाह है ....
कि रात भर .....
इन शांत किनारों पर.....
मेरी अल्हड लहरें.....
इज़हार करती रही ......
आ आके लौटती रहीं ......
और तुम......
तुम थे कि..... बस मुस्कुराते रहे .....
तुम introvert हो ना ?
और मैं .....
मैं बाँवरी ....
लिख के ले लो .....खूब जमेगी हमारी
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें