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रचना 0369

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ये चाँद गवाह है

ये चाँद गवाह है .... कि रात भर ..... इन शांत किनारों पर..... मेरी अल्हड लहरें..... इज़हार करती रही ...... आ आके लौटती रहीं ...... और तुम...... तुम थे कि..... बस मुस्कुराते रहे ..... तुम introvert हो ना ? और मैं ..... मैं बाँवरी .... लिख के ले लो .....खूब जमेगी हमारी
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें