कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 0365

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इन खामोशियों को

इन खामोशियों को ..... कुछ देर तलक ..... छोड़ जाओ मेरे पास क्या पता ..... मेरा उदास होना .... इन्हें बैचैन कर देगा और ये कह देंगी वो सब कुछ..... जो तुम चाह कर भी नहीं बोल पाये ... आज ... "बोलना ..... माहि बोलना".... वाला गाना .. इनके साथ गा के देखती हूँ .... "बोलना..... माहि बोलना" .... 😇😇😇😇
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें