कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 0356

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"ना ".....से "हां "......तक की दूरी

"ना ".....से "हां "......तक की दूरी न "तुम" तय कर सकोगे न "मैं " ये तो ....तय करेगा हमारा "रवैया" क्योंकि "हम तुम" तो ....स्थिर थे ... स्थिर ही रहेंगे बस ....."ना" और "हाँ" की पतवार थामेगा .... हमारा रवैया इन दोनों के बीच बहेगा.... हमारा रवैया इक दिन ..... "ना" को "हां" में ..... बदल कर ही रहेगा...... हमारा रवैया
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें