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रचना 0348

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"बेहतर कल" जीने के लिए

"बेहतर कल" जीने के लिए ..... वो इक लंबी सांस ..... ऑक्सिजन वाली नहीं..... "निर्णय वाली" लें ..... और बस अभी लें जीने ..... और सांस लेने में .....फर्क है ......भाई कोई देखता नहीं ....किसी को देता नहीं दिखाई
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें