कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 0342

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आज कुछ हाइकू

आज कुछ हाइकू..... लाल सूरज माथे पर टिकता सागर है माँ कच्ची सी उम्र वसुधा की विदाई ज़िद्दी मानव कोरा कागज़ बिकती रोशनाई बधिर सच पराये शब्द फेसबुकिया कवि गूंगे लाइक्स अजब शौक अपहृत आखर गुमनाम मैं कल्पना पाण्डेय
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें