कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 0340

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द्वार खोल के .....मन बहा देना

द्वार खोल के .....मन बहा देना ज़ार ज़ार सबको .....सच बता देना मलंग ऐसा बोलो कौन ? मैं .....और...... मेरी कलम और भला होगा कौन ?
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें