कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 0294

भाषा / Language

सोचती हूँ

सोचती हूँ ..... तुम्हारा नाम बदल के .... "सफ़र" रख दूं या "हसरत "कैसा रहेगा ? जितने कदम बढ़ाती जाती हूँ .... राह से धूप छॉंव हटाती जाती हूँ .... तुम ....रुकते नहीं मेरे लिए चलते चले जाते हो पीछे ...हटते चले जाते हो इक प्यास की तरह ..... उस उजास की तरह .... जो ......है भी और ....नहीं भी क्यों तुम ....रुक कर मेरा इंतज़ार नहीं कर सकते क्यों मुझे ....अपने में शुमार नहीं कर सकते शायद ....डरते हो कहीं मेरे छूते ही मैं ...."मंज़िल" तुम ...."सफ़र "न बन जाओ मैं ...."फितरत " तुम ....."हसरत "न बन जाओ सुनो..... इक बार ही सही .... मेरी तरह चल के तो देखो मेरी तरह ढल के तो देखो मुझमें "सफ़र" करके तो देखो मेरी "हसरत "करके तो देखो "सफर"..... "मंजिल "की इब्तेदा हो शायद "फितरत" ...."हसरत" की इन्तेहा हो शायद कल्पना पाण्डेय
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें