कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 0283

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हार गए हैं

हार गए हैं ..... अपने लफ़्ज़ों से तुम्हारी खुश्बू समेटते समेटते अब की .... कलम में ख़ामोशी उड़ेल रहे हैं कागज़ खाली छोड़ रहें है समझ सको तो सिर्फ "मुस्कुरा" देना इक बार फिर मेरी कोशिश महका देना कल्पना पाण्डेय
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें