कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 0265

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इक ......तुम ही हो

इक ......तुम ही हो जो ......मेरे लफ़्ज़ों की उदासी सोख सकते हो मेरे ......जाया हो रहे एहसासों को रोक सकते हो बस ....इक बार सिर्फ ....इक बार मुस्कुरा दो ना...... कुछ लफ्ज़ बंधे हैं आज .... मुदत्तों बाद उन्हें उडा दो ना..... बस ....जरा सी हवा दो ना ..... कल्पना पाण्डेय
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें