कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 0252

भाषा / Language

ख्वाब

ख्वाब ...... बड़े हो न हो ..... गहरे जरूर होने चाहिए .... ना उबर पाओ ..... ना सबर पाओ ..... बस ज़िन्दगी से ..... बस बंदगी से ..... © कल्पना पाण्डेय
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें