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रचना 0242

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तुम्हारे नाम के .......वो मंज़र ......याद रहते हैं

तुम्हारे नाम के .......वो मंज़र ......याद रहते हैं जो लफ्ज़ ........इश्क में खर्चे ...आबाद रहते हैं © कल्पना पाण्डेय
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें