भाषा / Language
मुठी भर लम्हों को
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मुठी भर लम्हों को .....
स्नेह की चाशनी में .....
भिगो कर
हथेलियों में धर देना
"कॉफ़ी" में .....आज "चीनी " कम है
कह देना ....…
अच्छा लगा .....
अच्छा लगा ....
आज बस .....
पास से तुम्हारा
गुज़र जाना
कुछ न कहना
बस मेरी आँखों में
नज़र आना
अच्छा लगा ....
अच्छा लगा ....
मुठी भर लम्हों में .....
आज मिलना ....
घुल जाना
बस मुझमें.....ज़रा सा
रह जाना
कल्पना पाण्डेय
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें