कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 0223

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जी कर देखो

जी कर देखो .... इन फूलों में मेरी ख्वाइशें सांस ले रही है हर पंखुरी तेरी आस दे रही है सिर्फ ..... तुम तक पहुंचेगी ये खुश्बू सिर्फ .... मैं और तुम हों रूबरू और .... संग होंगी कुछ ..... मोगरे की सौंधी सौंधी सलवटें कल्पना पाण्डेय
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें